बाज़ारवादी युग में दरकते इन्सानी रिश्तों पर लिखी आलोक की ग़ज़लें उनके निजी अनुभवों का आईना हैं। ‘आमीन’ की कई रचनाओं में सामाजिक सरोकार के सबूत मिले जिसने आलोक को सहज ही बेदार और प्रगतिशील कवियों की क़तार में ला खड़ा किया―वह क़तार जो हिंदी ग़ज़ल और उर्दू ग़ज़ल की ख़ेमेबंदी से परे सिर्फ़ और सिर्फ़ ग़ज़ल की हिफ़ाज़त कर रही है।
‘आमीन’ के प्रथम संस्करण की भूमिका शीर्ष लेखक कमलेश्वर ने लिखी जो किसी पुस्तक पर उनकी अंतिम भूमिका के रूप में याद की जाती है और मशहूर शायर-फ़िल्मकार गुलज़ार के पेशलफ़्ज़ ने इस पर एक मुकम्मल संग्रह होने की मुहर लगाई। दो भाषाओं का पुल बनाने वाले एक नौजवान के पहले संग्रह पर हिंदी और उर्दू के दो शिखर क़लमकारों के शब्द इस बात की गवाही बने कि आलोक ने अपना अदबी इम्तेहान पूरी संजीदगी और तैयारी से दिया है जो बहुत हद तक सही साबित हुई; वहीं दूसरे संस्करण की भूमिका डॉ नामवर सिंह ने लिखी, इस शुभकामना के साथ कि ये रचनाएँ और दूर तक पहुँचे। आमीन!
About the Author
शाजापुर(म.प्र) में 30 दिसंबर को जन्म। तीन दशक से ग़ज़लकार के रूप में प्रसिद्धि। सभी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन। पहला ही ग़ज़ल– संग्रह आमीन सर्वाधिक चर्चित, लोकप्रिय व बहु-पुरस्कृत पुस्तकों में शामिल। कई भारतीय व विदेशी भाषाओं में रचनाओं का अनुवाद।
शब्दशिल्पी सम्मान(भोपाल), हेमंत स्मृति कविता सम्मान(मुंबई), परंपरा ऋतुराज सम्मान(दिल्ली), मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी का दुष्यंत कुमार पुरस्कार, फ़िराक़ गोरखपुरी सम्मान (उदयपुर), मास्को(रूस) का अंतरराष्ट्रीय पुश्किन सम्मान सहित अमेरिका के वाशिंगटन में हिंदी ग़ज़ल सम्मान व कथा यूके की ओर से ब्रिटेन की संसद हाउस ऑफ कॉमन्स में सम्मानित हुए पहले युवा ग़ज़लकार।
Product details
- Publisher : Penguin Swadesh
- ISBN-10 : 014348009X
- ISBN-13 : 978-0143480099
- Author : Aalok Srivastava
- Language : Hindi
- Pages : 97
- Binding : Paperback



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