‘रसीदी टिकट’ अमृता प्रीतम की बहुचर्चित आत्मकथा है, जो बताती है कि उन्हें नफरत के दायरे पर तरस आता है; उन्हें विभाजन ने बुरी तरह प्रभावित किया था, जिससे ’वारिस शाह’ जैसी कविता की रचना हुई। उनकी यह आत्मकथा बताती है कि रचनाकार को कैसे अपनी आलोचना की परवाह नहीं करनी चाहिए, चाहे जमाना बैरी हो जाए। साहिर से करीबी और इमरोज़ से गहरी दोस्ती के बीच के वाकये को भी अमृता ने खूबसूरती से सामने रखा है। इस किताब को पढ़ना एक ऐसे बुखार से गुजरना है, जो आपको नायिका की जिंदगी की हर सच्चाई से रूबरू करा देता है।.
About the Author
अमृता प्रीतम पंजाबी के सबसे लोकप्रिय लेखकों में से एक थीं। उन्हें पंजाबी भाषा की पहली कवयित्री माना जाता है। उन्होंने कुल मिलाकर लगभग 100 पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें उनकी चर्चित आत्मकथा ‘रसीदी टिकट’ भी शामिल है। उन्हें भारत का दूसरा सबसे बड़ा सम्मान पद्मविभूषण प्रदान किया गया था। साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त करने वाली वे पहली महिला लेखिका थीं। भारत के सर्वोच्च साहित्यिक पुरस्कार, ज्ञानपीठ पुरस्कार से भी वे सम्मानित की गई थीं। उन्हें अपनी पंजाबी कविता ‘अज्ज आखाँ वारिस शाह नूँ’ के लिए बहुत प्रसिद्धि प्राप्त हुई। इस कविता में भारत विभाजन के समय पंजाब में हुई भयानक घटनाओं का अत्यंत दुखद वर्णन है और यह भारत और पाकिस्तान दोनों देशों में सराही गई।.
Product details
- Publisher : पेंगुइन बुक्स इंडिया
- Language : Hindi
- Pages : 144
- Binding : Paperback
- Author : अमृता प्रीतम
- Edition : 2018
- ISBN-10 : 9353490065
- ISBN-13 : 978-9353490065
- Item Weight : 130 g

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