काशीनाथ सिंह द्वारा लिखित ‘काशी का अस्सी’ एक महाकाव्य उपन्यास है जो वाराणसी के सबसे दक्षिणी घाट पर स्थित अस्सी नामक मोहल्ले के जीवन और काल को जीवंत रूप से प्रस्तुत करता है। यह काशी का केंद्र था, जहाँ लोग अपना फुरसत या खाली समय बिताने आते थे। यहाँ प्रोफेसर, छात्र नेता, धार्मिक गुरु आते थे और अपने विचारों और भावनाओं को उस भाषा में व्यक्त करते थे जो उन्हें सबसे सटीक रूप से दर्शाती थी। हालाँकि, वैश्वीकरण के आगमन और अर्थव्यवस्था के उदारीकरण के साथ-साथ सांप्रदायिक पहचान के उदय ने अस्सी के निवासियों से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता छीन ली। वाराणसी में बसने या तथाकथित भारतीय संस्कृति सीखने के लिए आए विदेशियों ने अंततः उस चीज़ को ही बदल दिया जिसके लिए वे काशी आए थे – यहाँ तक कि मानवीय संबंधों के ताने-बाने को भी।
About the Author
जन्म : 1 जनवरी, 1937, बनारस जिले के जीयनपुर गाँव में । शिक्षा : आरम्भिक शिक्षा गाँव के पास के विद्यालयों में। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से हिन्दी में एम.ए. (1959) और पी-एच.डी. (1963)। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष रहे। पहली कहानी ‘संकट’ कृति पत्रिका (सितम्बर, 1960) में प्रकाशित। कृतियाँ : लोग बिस्तरों पर, सुबह का डर, आदमीनामा, नई तारीख, सदी का सबसे बड़ा आदमी, कल की फटेहाल कहानियाँ, प्रतिनिधि कहानियाँ, दस प्रतिनिधि कहानियाँ, कहानी उपख्यान (कहानी-संग्रह); घोआस (नाटक); हिन्दी में संयुक्त क्रियाएँ (शोध); आलोचना भी रचना है (समीक्षा); अपना मोर्चा, रेहन पर रग्घू, महुआचरित, उपसंहार (उपन्यास); याद हो कि न याद हो, आछे दिन पाछे गए (संस्मरण), गपोड़ी से गपशप (साक्षात्कार)। अपना मोर्चा का जापानी एवं कोरियाई भाषाओं में अनुवाद। जापानी में कहानियों का अनूदित संग्रह। कई कहानियों के भारतीय और अन्य विदेशी भाषाओं में अनुवाद। उपन्यास और कहानियों की रंग-प्रस्तुतियाँ। ‘तीसरी दुनिया’ के लेखकों-संस्कृतिकर्मियों के सम्मेलन के सिलसिले में जापान-यात्रा (नवम्बर, 1981)। सम्मान : कथा सम्मान, समुच्चय सम्मान, शरद जोशी सम्मान, साहित्य भूषण सम्मान और ‘रेहन पर रग्घू’ उपन्यास के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार, रचना समग्र पुरस्कार। सम्प्रति : बनारस में रहकर स्वतंत्र लेखन।
Product details
- Publisher : Rajkamal Prakashan
- ISBN-10 : 8126711469
- ISBN-13 : 978-8126711468
- Author : Kashinath Singh
- Language : Hindi
- Pages : 171
- Binding : Paperback
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