“टूटी हुई बिखरी हुई” मानव कौल का एक उपन्यास है जोजीवन में व्यस्तता की निरर्थकता पर केंद्रित है, जहाँ लेखक निष्क्रिय रहकर भी खुद को सबसे ज़्यादा ‘सम’ पर पाता है
यह उपन्यास एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो जीवन में ज़्यादा से ज़्यादा खाली समय पाने की चाहत रखता है और काम की व्यस्तता में अपनी ज़िंदगी नहीं गंवाना चाहता। यह उपन्यास लेखक की व्यक्तिगत सोच और जीवन दर्शन को दर्शाता है।
- मुख्य विचार:यह उपन्यास इस विचार पर आधारित है कि व्यस्त रहना मूर्खतापूर्ण हो सकता है। लेखक का मानना है कि खाली समय में वह सबसे ज़्यादा “सम” पर होता है और सुरक्षित जीवन की चाह में काम करते-करते मर जाना नहीं चाहता है।
- पात्र:एक व्यक्ति का चित्रण किया गया है जो काम की भागमभाग से दूर रहना चाहता है और अपनी ज़िंदगी को अपनी शर्तों पर जीना चाहता है।
- लेखक का दृष्टिकोण:मानव कौल की यह कृति उनके अपने व्यक्तिगत दर्शन को दर्शाती है, कि कैसे वह खाली समय को महत्व देते हैं और व्यस्तता से बचते हैं।
- अन्य कार्य:यह उपन्यास “ठीक तुम्हारे पीछे” और “प्रेम कबूतर” जैसी उनकी पिछली सफल किताबों के बाद आया है, और इसने भी पाठकों के बीच विशेष स्थान बनाया है।About The Authorमानव कौल एक भारतीय अभिनेता, नाटककार, लेखक और फिल्म निर्देशक हैं, जिनका जन्म 19 दिसंबर 1976 को बारामूला, कश्मीर में हुआ था। उन्होंने 2004 में थिएटर समूह ‘अर्न्य’ की स्थापना की और कई प्रशंसित नाटक लिखे और निर्देशित किए। वे ‘काय पो चे!’, ‘वज़ीर’, और ‘तुम्हारी सुलु’ जैसी फिल्मों में अपने अभिनय के लिए जाने जाते हैं और ‘हंसा’ नामक फिल्म से निर्देशक के तौर पर शुरुआत की।Product Details
- Publisher : Hindi Yugam
- ISBN 13 : 9789392820793
- Author : Manav Kaul
- Pages : 256
- Binding : Paperback

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